8:51 pm - Sunday May 20, 2018

लव जिहाद

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इस अफ़साने (कहानी ) के लेखक एक जाने माने उर्दू पत्रकार  जिन की वर्तमान सामाजिक विषयों पर पनि निगाह रहती हे।

सय्यद मुहम्मद मोहसिन इस अफ़साने (कहानी ) के लेखक एक जाने माने उर्दू पत्रकार हैं जिन की वर्तमान सामाजिक विषयों पर पेनी निगाह रहती हे।

सय्यद मुहम्मद मोहसिन

झुर्रियों से भरा चेहरा , आसमान की तरफ तकती उस की बे नूर निगाहें ना जाने किस ग़म को अपने अंदर समेटे हुए थीं। इस्लामुद्दीन से जब में पहली बार मिला था तो वह बहुत ही खुश मिजाज़ और सेहतमंद हुआ करता था। बार बार उसकी ज़ुबान पर आजा था की उसका इकलोता बेटा अकबरुद्दीन बंगलोरे में इंजीनियरिंग की पढाई करने गया हे। दो साल के बाद वह कमाने लगेगा और जो कुछ उस ने अपना खेत बार गिरवी रख कर उसकी पढाई पर खर्च किया हे वह उसे साहूकार के चुंगल से निकाल लेगा।
कई बरसों तक मेरा अपने गाओं जाना नहीं हुआ लेकिन आज तीन साल बाद जब में अपने गाओं गया तो सोचा के जाकर इस्लामुद्दीन से उस का हाल चाल पूछ आऊं। लेकिन मुझे वह अपने घर पर नहीं मिला पड़ोसियों ने बताया की उसने अपना मकान बीच दिया हे और गाओं के दुसरे कोने पर रहता हे। मुझे यह सुन कर खुशी हुई  के शायद उसका बेटा अच्छा कमाने लगा हे और उस ने नया घर बना लिया होगा।
गाओं के उस कोने जिस की जानिब पडोसी ने इशारा किया था वहां पहुचने पर किया देखता हूँ के पॉलिथीन की छत पड़े झोपड़ी नुमा मकान  के बाहर इस्लामुद्दीन उसी तरह बैठा हे जैसा ऊपर बयान किया हे।
उस की इस बदहाली के बारे में जानने के लिए में बहुत बेचैन  हो उठा। इधर उधर की बातों के बाद में ने उस से उस की इस हालत के बारे में जानना चाहा तो वह फफक फफक कर रो पड़ा और उस ने जो कहानी बयां की वह आज के माहोल पर सवालिया निशान लगाती हे।

उस ने बताया के जब उसे अपने बेटे की नौकरी लगने की सूचना मिले तो वह बहुत खुश हुवा की अब उसके तमाम सपने पूरे होजाएंगे वह बहुत जल्द अपने ग़रीब भाई जिस के पास अपनी बेटी की शादी करने के हैसियत नहीं हे उसको अपने घर बहु बनाकर लाएगा और अपने भाई का बोझ हल्का कर देगा।
एक दो महीने तक तो लड़के का मनी आर्डर आया लेकिन उस के बाद वह आना बंद होगया।
कई माह बाद जानकारी मिली के उस ने अपने साथ पढ़ने वाली एक ग़ैर मज़हब लड़की से शादी कर ली हे और वह अपने सुसराल वालों के साथ रह रहा हे।
जब इस्लामुद्दीन पर करज़दारों का  तकाज़ा बढ़ा तो उसने अपना खेत मकान बेच कर सारा क़र्ज़ अदा किया और अब इस झोपड़े नुमा झुग्गी में रह रहा हे।
आज जब सियासत के नाम पर लव जिहाद की आग की तरह फैलती चिंगारी दिखाए दी तो मुझे उस बूढ़े इस्लामुद्दीन और उस जैसे हज़ारों इस्लामुद्दीन का मुरझाया हुआ चेहरा याद आगया ।

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