5:05 pm - Monday July 23, 2018

दिल्ली में राष्ट्रपति शासन को लेकर सुनवायी स्थगित

583 Viewed रुदौली न्यूज़ टीम 0 respond

दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के खिलाफ आम आदमी पार्टी की याचिका की सुनवाई 28 अकटूबर तक स्थगित कर दी गई है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष शुक्रवार को स्पष्ट किया कि दिल्ली में सरकार बनाने की कवायद को लेकर उपराज्यपाल नजीब जंग ने राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को जो पत्र लिखा था उसका जवाब अभी तक नहीं आया है।

केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने मुख्य न्यायाधीश एच एल दत्तू की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ को बताया कि उपराज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र विचाराधीन है और इस पर अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। संविधान पीठ दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के खिलाफ आम आदमी पार्टी (आप) की याचिका की सुनवाई कर रही है।

कुमार ने न्यायालय को यह भी बताया कि इस मामले में सरकार की ओर से जिरह कर रहे अतिरिक्‍त सॉलिसिटर जनरल पी एस नरसिम्हन के पिता की तबीयत खराब है। उन्होंने दलील दी कि सरकार को कुछ समय दिया जाना चाहिए, ताकि इस दौरान उपराज्यपाल के पत्र पर राष्ट्रपति का कोई न कोई फैसला जरूर आ जाएगा और तब तक नरसिम्हन के पिता की तबीयत भी ठीक हो जाएगी और वह मामले में केंद्र सरकार का पक्ष रख सकेंगे।

सॉलिसिटर जनरल की इन दलीलों पर आप की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवकता फली एस नरीमन ने कोई विरोध नहीं जताया और न्यायालय ने मामले की सुनवाई 28 अक्‍टूबर तक के लिए मुल्तवी कर दी। पिछले दिनों यह खबर प्रकाशित हुई थी कि राष्ट्रपति ने उपराज्यपाल को अपना जवाब भेज दिया है। संविधान पीठ ने गत नौ सितम्बर को राजधानी में सरकार गठन को लेकर जारी गतिरोध समाप्त करने केलिए केंद्र सरकार को एक माह का वक्‍त दिया था। हालांकि उसने विधायकों की खरीद फरोख्त के आप के आरोपों को रिकॉर्ड में लेने से फिलहाल इन्कार कर दिया था।

आप ने भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली प्रदेश इकाई के एक वरिष्ठ पदाधिकारी द्वारा उसके विधायकों की खरीद फरोख्त करने के आरोपों को लेकर न्यायालय में हलफनामा भी दिया था तथा नरीमन ने दलील दी थी कि एक पार्टी द्वारा दिल्ली में सरकार गठन को लेकर विधायकों की खरीद फरोख्त जारी है, लेकिन न्यायालय ने इस बारे में आज की सुनवाई में विचार करने से इन्कार कर दिया था।

न्यायमूर्ति दत्तू ने स्पष्ट कर दिया था कि संविधान पीठ दिल्ली विधानसभा भंग करके नये सिरे से चुनाव कराने संबंधी विभिन्न संवैधानिक पहलुओं पर विचार के लिए बिठाई गई है तथा विधायकों की खरीद फरोख्त को लेकर याचिकाकर्ता के हलफनामे पर बाद में विचार किया जाएगा। संविधान पीठ के अन्य सदस्य हैं न्यायमूर्ति जस्ती चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति एके सिकरी, न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली विधानसभा निलंबित रखते हुए यहां राष्ट्रपति शासन लगाया गया है। आप ने राष्ट्रपति शासन को चुनौती देते हुए विधानसभा भंग कराने तथा यथा शीघ्र चुनाव कराने का निर्देश सरकार को देने का न्यायालय से आग्रह किया है।

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