4:03 pm - Sunday April 22, 2018

यूपी-7 फेज में चुनाव: जानें आपके जिले में किस दिन होगी वोटिंग, होली से 2 दिन पहले आएगा रिजल्‍ट

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लखनऊ.इलेक्‍शन कमीशन ने यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का 4 जनवरी को एलान कर दिया। यूपी की 403 विधानसभा सीटों पर 7 चरणों में हर चौथे दिन वोटिंग होगी। काउंटिंग 11 मार्च को होगी। इलेक्‍शन कमीशन के मुताबिक,1 जनवरी 2017 तक यूपी में करीब 14.16 करोड़ वोटर्स हैं। चुनाव के रिजल्‍ट के 2 दिन बाद 13 मार्च 2017 को होली है।यूपी चुनाव में सबसे बड़ा फैक्‍टर कास्‍ट सिस्‍टम…

 

-यूपी के बारे में एक कहावत चर्चित है कि यहां वोटर वोट नेता को नहीं,जाति को देते हैं। यहां जिस पार्टी को 30%से ज्यादा वोट मिलेंगे,जीत उसकी तय है।

-लेकिन ये 30%वोट 4 बड़ी जातियों के बीच फंसे हैं। 23%जनरल के हैं तो 41%ओबीसी के। 21.1%दलित हैं तो 19.3%मुस्लिम। 

 

सभी पार्टियों ने बनाई चुनावी स्‍ट्रैटजी 

-यूपी में होने वाले इलेक्शन के लिए सभी पार्टियों ने अपनी स्ट्रैटजी बना ली है।
-मुलायम यादवों के रहनुमा बने हुए हैं। वहीं,मायावती दलितों और मुसलमानों की। इसलिए इस बार भी 403 कैंडिडेट्स में बीएसपी ने मुसलमान और दलितों को ज्यादा वोट दिए हैं।
-ओबीसी के लिए बीजेपी ने केशव मौर्य को अध्यक्ष बनाया है। वहीं,कांग्रेस ने अगड़ी जाति को संभालने के लिए शीला दीक्षित को आगे किया है।
-जाति के इस खेल को खुलकर मायावती ही स्वीकार करती हैं। माया ने सभी कैंडिडेट्स की जाति के अनुसार सूची जारी करके ये साबित भी कर दिया। 
-जाति के इसी चक्रव्यूह के कारण कांग्रेस 27 साल से सत्ता से बाहर है,वहीं बीजेपी 14 साल से।

 


#1.बीजेपी
-जनरल,गैर यादव ओबीसी,ओबीसी,और गैर जाटव दलित पर बीजेपी की अच्छी पकड़ है।
-एक सर्वे के मुताबिक जनरल वोट बैंक में बीजेपी को 56%ब्राह्मण,3 फीसदी क्षत्रिय,1.5%वैश्य वोट मिलते हैं। 
-अति पिछड़ों में लोध 7%,कुशवाह(मौर्य,शाक्य,कोरी,कांछी,सैनी)-14%,कुर्मी 3%बीजेपी के खास वोटर हैं। 
-गैर जाटव में वाल्मीकि,धोबी,खटीक,कोल,गोड़,खरवार पर पकड़ है।

 

फ्लोटिंग:
-लेकिन जनरल,गैर यादव ओबीसी,अति पिछड़े और गैर जाटव दलित वोटर्स मौका देखकर बसपा,सपा में शिफ्ट होते रहे हैं।
-लोध नेता कल्याण सिंह,ओबीसी नेता रामकुमार वर्मा ने पार्टी छोड़ी तो यह वोट बैंक भी छिटक गया।
-इसी तरह मायावती के ब्राह्मण कार्ड के दौरान ब्राह्मण वोटर बहुजन समाजवादी पार्टी में चले गए।
 

फॉर्मूला:
-सरकार बनाने के लिए बीजेपी को 60%जनरल,गैर यादव,गैर जाटव,ओबीसी के वोट में से 32 फीसदी वोट हासिल करना होगा।

 

स्ट्रैटजी:
-यूपी में बीजेपी ने 23 जिलों में पिछड़ी जाति से ताल्लुक रखने वाले,तीन में दलितों को अध्यक्ष बनाया है।
-एक आदिवासी समेत तीन पिछड़ी जाति के रीजनल प्रेसिडेंट हैं। ओबीसी के नेता केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है।
 

#2.समाजवादी पार्टी
-मुस्लिम और यादव परंपरागत वोटर हैं। एक ट्रेन्ड के मुताबिक,80 फीसदी यादव वोट सपा को जाते हैं। जबकि 50 फीसदी मुस्लिम वोटर सपा के साथ हैं।
-इसके अलावा राजपूत,ब्राह्मण,कुर्मी और अन्य पिछड़ी जातियों(पासी,धानुक,गोड़,कोरी आदि अलग-अलग दलों में बंटती रहीं हैं)पर भी सपा की पकड़ है।

 

फ्लोटिंग:
-मुस्लिम वोट सपा और बसपा में बंटता रहा है। मुस्लिम उसी दल को वोट देता है जो बीजेपी को हराने की स्थिति में है।
-यादव वोट न के बराबर स्विंग होता है। पर लोकसभा चुनाव में 54%यादव बीजेपी के साथ गए थे।

 

फॉर्मूला:
-दोबारा सत्ता में आने के लिए 65 फीसदी यादव-मुस्लिम वोट,14%ब्राह्मण,30%गैर यादव ओबीसी वोट हासिल करना होगा।

 

स्ट्रैटजी:
-यादव-मुस्लिम और गैर यादव ओबीसी के फार्मूले पर कैंडिडेट उतारने का इरादा।
-इसके अलावा जनरल जातियों के वोट खींचने की कोशिश।

 

#3.बहुजन समाज पार्टी
-एससी और अल्पसंख्यक परंपरागत वोटर हैं। जाटव एससी का एकतरफा वोट बसपा जाता है। साथ ही चार फीसदी गैर जाटव दलित का भी वोट मिलता है।
-अति पिछड़े वोटर में अच्छी पकड़ है। इसके अलावा 40%मुस्लिम वोट पर पकड़ है।

 

फ्लोटिंग:
पिछली बार 2007 के चुनाव में मायावती ब्राह्मण,दलित और मुस्लिम वोटर के कॉम्बिनेशन से सत्ता मिली। पर 2012 में समीकरण फेल।

 

फॉर्मूला:
सत्ता में काबिज होने के लिए 60 फीसदी दलित-मुस्लिम वोट,10%ब्राह्मण,27%अति पिछड़े वोट हासिल करने होंगे।

 

स्ट्रैटजी:

45%सीटों पर दलित और मुस्लिम कैंडिडेट्स उतारे और 66 सीटों पर ब्राह्मण कैंडिडेट्स उतारे। 66 ब्राह्मण कैंडिडेट्स उतारे हैं।
 

#4.कांग्रेस
-यूपी में कांग्रेस जनाधार खो चुकी है। 27 साल से सत्ता से दूर है। पार्टी का अगड़ी,दलित और मुस्लिम वोट बैंक खिसक चुका है।
-बावजूद इसके कांग्रेस का एक परंपरागत वोटर है। उसे हर विधानसभा चुनाव में औसतन 9 फीसदी वोट मिलते हैं। करीब औसतन 24 सीटों पर कब्जा है।

 

स्ट्रैटजी:

-जनरल,पिछड़े और मुस्लिम वोटबैंक पर फोकस। हालांकि,उसका फोकस सपा के साथ गठबंधन कर अपनी स्थिति मजबूत करने पर है,क्योंकि सपा को औसतन 25%वोट बैंक है। 
-यदि इसमें कांग्रेस का 9%वोट जोड़ दिए जाए तो 34%होता है। यह सत्ता में पहुंचने का सबसे सरल और सीधा गणित है।
 

फॉर्मूला
-जनरल 65%सवर्ण-दलित वोट,17%ओबीसी और 50%मुस्लिम वोट पाकर सत्ता में पहुंच सकती है।

www.rudaulinews.com

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